भगवान शंकर आश्रम में गुरुदेव आर्यम जी महाराज ने संपन्न कराया रुद्र भैरव महाशिवरात्रि अनुष्ठान
देशभर से बड़ी संख्या में पहुंचे साधक शिष्य, अनेक ने की ऑनलाइन सहभागिता

मसूरी। आर्यम इंटरनेशनल फाउंडेशन द्वारा हाथीपांव मार्ग पर संचालित भगवान शंकर आश्रम में महाशिवरात्रि, भगवान शिव की आराधना और उनके तप, त्याग एवं त्राणकारी स्वरूप को स्मरण करने वाला एक अत्यंत पावन और आध्यात्मिक पर्व है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को आर्यम इंटरनेशनल फाउंडेशन के तत्त्वावधान में संचालित भगवान शंकर आश्रम द्वारा आयोजित रुद्र भैरव महाशिवरात्रि अनुष्ठान संपन्न हुआ। इस अद्वितीय पूजा में देशभर से बड़ी संख्या में भक्तों ने भाग लिया। परमप्रज्ञ जगद्गुरु प्रोफेसर पुष्पेंद्र कुमार आर्यम महाराज के दिव्य सानिध्य में आयोजित इस धार्मिक पूजा में विदेशों में निवासरत अनेक शिष्यों ने भी ऑनलाइन सहभागिता दर्ज की।

इस विशेष अनुष्ठान के महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए गुरुदेव आर्यम जी महाराज ने शिष्यों को बताया कि रुद्र एवं भैरव, शिव-तत्त्व के वे गहन आयाम हैं, जो सृजन, संरक्षण एवं अंतःशुद्धि के शाश्वत सिद्धांतों का प्रतिनिधित्व करते हैं। गुरुदेव ने स्पष्ट किया कि रुद्र-तत्त्व साधक के भीतर स्थित विकारों, अशांति एवं मानसिक अवरोधों का शमन करता है, जबकि भैरव-तत्त्व चेतना को निर्भीकता, स्थिरता एवं आंतरिक सामर्थ्य की दिशा में जागृत करता है। आर्यम जी महाराज ने स्वर्ण भैरव के विषय में भी शिष्यों को अवगत कराया। भैरव शक्ति के साथ जुड़कर समृद्धि, प्रसिद्धि के गुणों को विस्तार देते हैं।
गुरुदेव ने स्पष्ट किया कि भगवान शिव केवल एक पूज्य देवस्वरूप नहीं, बल्कि शाश्वत सत्य, संतुलन एवं चिरंतन चेतना के प्रतीक हैं। उन्होंने समझाया कि सत्य की खोज अंततः शिव की अनुभूति की ओर ले जाती है, क्योंकि शिव-तत्त्व जीवन की उस परम वास्तविकता का प्रतिनिधित्व करता है, जो परिवर्तन, भ्रम एवं विकारों से परे है। गुरुदेव आर्यम जी महाराज ने बताया कि शिव ही वह दिव्य शक्ति हैं, जो साधक को अज्ञान से ज्ञान, अस्थिरता से संतुलन एवं भ्रम से सत्य की ओर मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। शिव-तत्त्व आत्मजागरण, विवेक, धैर्य एवं सत्यनिष्ठ जीवन का संदेश देता है। गुरुदेव ने इस तथ्य पर बल दिया कि शिव की उपासना वस्तुतः सत्य की उपासना है, क्योंकि शिव स्वयं शुद्ध चेतना एवं परम सत्य के साक्षात् प्रतीक हैं।
ट्रस्ट की अधिशासी प्रवक्ता मां यामिनी श्री ने बताया कि गुरुदेव आर्यम जी महाराज द्वारा धर्म एवं आध्यात्मिक चेतना के क्षेत्र में संचालित विविध आयोजन आज वैश्विक स्तर पर जीवन-परिवर्तन का सशक्त माध्यम बन चुके हैं। गुरुदेव के दिव्य मार्गदर्शन में सम्पन्न होने वाले वैदिक अनुष्ठान विशेषतः आर्यम अग्निहोत्र एवं आर्यम पुष्पार्चन, साधकों के जीवन में शांति, संतुलन एवं सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर रहे हैं। अग्निहोत्र की पावन यज्ञाग्नि जहां सामूहिक चेतना एवं आध्यात्मिक सामंजस्य को प्रोत्साहित करती है। वहीं पुष्पार्चन की प्राचीन साधना वैदिक मंत्रों एवं भावनात्मक एकाग्रता के माध्यम से अंतःचेतना के परिष्कार का माध्यम बनती है। गुरुदेव आर्यम जी महाराज के दार्शनिक एवं व्यवहारिक प्रवचन विश्वभर के श्रद्धालुओं को आत्मजागरण, विवेक एवं संतुलित जीवन-दृष्टि की ओर प्रेरित करते हुए चेतना-विकास एवं जीवन-सार्थकता का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं।
