झनकारो झनकारो…. होली खेलत हैं कैलाशपति…

देहरादून। बसंत पंचमी हिन्दू पंचांग के अनुसार माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाने एक अत्यंत शुभ पर्व है यह दिन ज्ञान, विद्या, संगीत और कला की देवी सरस्वती को समर्पित है । कूर्मांचल सांस्कृतिक एवं कल्याण परिषद ने सामूहिक रूप से बसंत पंचमी आगमन के अवसर पर ऐपड बना कर शुरूआत की। कार्यक्रम की शुरुआत पूर्व निदेशक संस्कृति विभाग बिना भट्ट द्वारा किया गया। कूर्मांचल परिषद की सांस्कृतिक सचिव बबीता साह लोहानी ने बताया कि बसंत पंचमी के दिन पीले रंग का विशेष महत्व होता है क्योंकि यह रंग समृद्धि , सकारात्मक और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है।
पुराणों के अनुसार श्री कृष्ण ने सरस्वती से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया था कि बसंत पंचमी के दिन तुम्हारी भी आराधना की जाएगी तभी से इस वरदान के फलस्वरूप भारत देश में बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्वती जी की भी पूजा होने लगी जो आज भी जारी है । केंद्रीय अध्यक्ष कमल रजवार ने बताया कि
उत्तराखंड के कुमाऊं में बसंत पंचमी से बैठकी होली की की शुरुआत हो जाती है, जो सबसे ज्यादा चलने वाला उत्सव है जिसमें होली पर आधारित गीत घर की बैठक में राग रागनियो के साथ हारमोनियम और तबले पर गाए जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्र में ग्रामीण और होली के गीत गाने वाले होलियार ,तबला, तुरही, हारमोनियम और कई अन्य स्थानीय वाद्य यंत्रों के साथ मिलकर सांस्कृतिक राग गाते हैं। बैठकी होली का मुख्य केंद्र अल्मोड़ा और नैनीताल रहे हैं जहां 150 से अधिक वर्षों से बैठक होली चली आ रही है। महिलाएं अलग से होली घर घर जाकर गाती हैं। सबसे प्रसिद्ध बैठकी होली समूह चंपावत जिले के पति गांव में रहते हैं और हर परिवार में कम से कम एक संगीतकार होता है जो क्षेत्रीय भाषा या हिंदी में अपने बनाए गए बैठकी होली गीत गाते हैं। कुछ मुख्य गीत के बोल इस प्रकार है।
झनकारो झनकारो …..
होली खेलत हैं कैलाशपति…..
हरि धरे मुकुट खेल होरी….. कार्यक्रम में कांवली, प्रेमनगर, माजरा, कांवली, कांडली, गढ़ी, नथनपुर , धर्मपुर, हाथीबड़कला शाखाओं ने भाग लिया।

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