दून लाइब्रेरी में राजी समुदाय ने अपनी बात रखी

राजधानी पहुंचे राजी समुदाय के साथ नागरिक समाज ने एकजुटता व्यक्त की
देहरादून। राजी समुदाय का समावेशी विकास के तहत बुधवार को दून लाइब्रेरी में आयोजित सेमिनार में राजी जनजाति के प्रतिनिधि युवक युवतियों ने शहर के नागरिक समाज के सामने अपनी बात रखी। इस कार्यक्रम में न सिर्फ़ राजी समुदाय ने अपनी बात रखी बल्कि उनको सुनने जानने पहुंचे नागरिकों ने उनके प्रति एकजुटता दिखाते हुए समुदाय के विकास में सहयोग का वादा किया।
कार्यक्रम की शुरुआत राजी युवक-युवतियों के जनगीत के साथ हुई। इसके साथ ही प्रथम सत्र का आगाज ‘हमारी कहानी हमारी जुबानी’ के साथ हुआ। इस सत्र में राजी युवा ललित सिंह रजवार ने राजी जनजाति के इतिहास से लेकर वर्तमान तक की यात्रा का जिक्र करते हुए पूरे समुदाय के जीवन संघर्षों पर प्रकाश डाला कि कैसे राजियों ने गुफा से लेकर घर तक का सफर तय किया है। ललित ने बताया कि हम आज भी वन अधिकार के तहत जमीन के राजस्व पट्टे का इंतजार कर रहे हैं। जंगल पर आश्रित हमारे समाज को सामुदायिक वन अधिकार भी अभी तक नहीं मिला। कविता देवी ने जड़ी बूटियों को लेकर राजियों के ज्ञान और उनके उपयोग पर बात करते हुए कहा कि हम अभी भी सर दर्द, पेट दर्द या छोटी मोटी चोट लगने पर जड़ी बूटियों का प्रयोग करते हैं, लेकिन अब जंगल में ये दवाइयां मिलना मुश्किल हो रहा है। इसके संरक्षण के लिए हमे सामुदायिक वन अधिकार चाहिए। इसी क्रम में हंसा देवी, पुष्पा देवी व कमल सिंह रजवार ने महिलाओं के संघर्ष, आजीविका की समस्या, बच्चों के लिए शिक्षा की चुनौतियां व स्वास्थ्य समस्या पर बात रखी। कार्यक्रम के दूसरे सत्र में राजी समुदाय के साथ सहयोग करने की मंशा व्यक्त करते हुए विज्ञान व तकनीकी की क्षेत्र में काम कर रहे डॉ बृजमोहन शर्मा ने कहा कि हम राजी युवाओं को तकनीकी रूप से दक्ष होने की ट्रेनिंग देकर उनको स्वरोजगार स्थापित करने में मदद करने को तैयार हैं। जो पूरी तरह से निःशुल्क मदद होगी। इसी क्रम में मुकाम संस्था की संस्थापक सदस्य सोमा ने कहा कि बाजार के हस्तक्षेप से पारंपरिक औषधियां विलुप्त होने की कगार पर हैं। राजी महिलाएं इसके संरक्षण के लिए काम करती हैं तो हम इनके संगठन को हर संभव मदद करने को तैयार हैं। पर्वतीय बाल मंच की आदिती कौर ने राजी समुदाय के बच्चों के प्रति रचनात्मक सहयोग व्यक्त करते हुए कहा कि बच्चे कहानी लिखें और हम उसको छापेंगे, साथ ही उन्होंने बाल सुरक्षा पर बात करते हुए राजी समुदाय में बाल संरक्षण समिति के गठन को लेकर बात कही। पीपुल्स साइंस इंस्टीट्यूट के पूरन वर्तवाल ने कहा कि हम फ्री ऑफ कास्ट किसी भी इंटर पास राजी लड़के या लड़की को एक साल का डेवलपमेंट कोर्स कराने में पूरी तरह से मदद करने को तैयार हैं। इसी के साथ ही सामाजिक कार्यकर्ता सुजाता सिंह, दीपा आदि ने राजी समुदाय के साथ एक जुटता दिखाते हुए सहयोग की बात कही। अर्पण संस्था की संस्थापक रेणु ठाकुर ने सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में राजी समुदाय के 10 प्रतिनिधियों के साथ ही, आरएलएस दिल्ली से विनोद कोष्टी, रिसर्चर दीपिका अधिकारी, अर्पण संस्था के सदस्य, स्टूडेंट्स आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम के आखिरी सत्र में सवाल-जवाब का दौर चला।

आपको बता दें कि पीवीटीजी समुदाय में आने वाले राजी समुदाय के प्रतिनिधि पिथौरागढ़ से अपनी बात रखने पहली बार तीन दिवसीय यात्रा पर राजधानी पहुंचे। यात्रा के पहले चरण में एफआरआई, बैंबू बोर्ड, महिला आयोग पहुंचे। दूसरे दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के साथ ही, मानव अधिकार आयोग पहुंचकर अपनी बात रखी और तीसरे दिन शहर के नागरिक समाज के साथ संवाद स्थापित किया।

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