अपरा मेहता की कलर्स पर वापसी से ‘दो दुनिया एक दिल’ में नया मोड़, बलदेव का अतीत होगा उजागर

मुंबई । ऑनलाइन पर्सोना और ऑफलाइन सच्चाई पर चल रही बहसों के बीच कलर्स का शो ‘दो दुनिया एक दिल’ आजकल टीवी पर सबसे ज़्यादा चर्चा में है। दर्शकों को दीवाना बना रहा है इसका वो पहलू, जिसमें यह दिखाया जाता है कि लोग पब्लिक में कैसे नज़र आते हैं, कैसे खुद को पेश करते हैं और कैसे जज किए जाते हैं, बनाम असल ज़िंदगी में वे कौन हैं। जैसे-जैसे शिवाय और आध्या का रिश्ता भावनात्मक मज़बूती पकड़ने लगता है, कहानी अचानक भीतर की ओर मुड़ती है और ध्यान जाता है उस किरदार पर जिसे अब तक सिर्फ़ ताक़त और कंट्रोल से परिभाषित किया गया था। इस बदलाव की वजह है अपारा मेहता की एंट्री, जो बलदेव सिंह चौहान की मां का किरदार निभा रही हैं और जिनके ज़रिए दर्शकों को बलदेव की असली शख़्सियत देखने को मिलेगी।
अब तक बलदेव को एक ठंडे, चालाक बिल्डर के रूप में दिखाया गया है – एक ऐसा शख़्स जो स्कैम करता है, नियमों और लोगों को अपने हिसाब से मोड़ता है और अपने मक़सद पूरे करने के लिए किसी भी हद तक जाता है। डराया जाने वाला, बिना सवाल किए जाने वाला और मानो अछूता – वह अब तक सिर्फ़ सत्ता का प्रतीक रहा है। लेकिन उसकी मां की एंट्री से नज़रिया पूरी तरह बदल जाता है। उनकी मौजूदगी उसे तुरंत नरम नहीं करती, बल्कि यह दिखाती है कि वह ऐसा बना कैसे। उनकी चुप्पी, उनका संयम और बेटे को प्राथमिकता देने की उनकी सहज प्रवृत्ति के ज़रिए शो बलदेव की सोच का भावनात्मक नक्शा खींचना शुरू करता है। दर्शकों को पहली बार यह झलक मिलती है कि कंट्रोल उसका कवच क्यों बना और कैसे बचपन की अनकही उम्मीदों और भावनात्मक दूरी ने उसे आज का बलदेव बनाया।
अपनी भूमिका पर बात करते हुए अपारा मेहता ने कहा, “मैं कलर्स पर ‘दो दुनिया एक दिल’ के साथ वापसी को लेकर बहुत उत्साहित हूं। इस शो में हर किसी के लिए कुछ है। शो में बलदेव को दुनिया एक दबंग और निर्दयी इंसान मानती है, लेकिन अपनी मां के सामने उसका नक़ाब उतर जाता है। तब आप देख पाते हैं कि उसे कैसे पाला गया, किस भावनात्मक माहौल में वह बड़ा हुआ और कैसे वही माहौल उसकी पसंद और फैसलों को तय करता है। मुझे लगता है कि ‘दो दुनिया एक दिल’ इतनी गहराई से जुड़ रहा है क्योंकि यह आज की हकीकत को दिखाता है। हम ऐसे समय में जी रहे हैं जहां लोग ऑनलाइन और ऑफलाइन बहुत अलग होते हैं, और शो उस कॉन्ट्रास्ट को बख़ूबी पकड़ता है। यह मां वैसी नहीं है जैसी हम टीवी पर अक्सर देखते हैं। आगे के एपिसोड्स में दर्शकों को पता चलेगा कि वह क्या करने वाली है। जब मैं मां का किरदार निभाती हूं तो हमेशा कोशिश करती हूं कि एक भावनात्मक सच्चाई छोड़ जाऊं, जो एपिसोड ख़त्म होने के बाद भी दर्शकों के साथ बनी रहे। मैं चाहती हूं कि दर्शक यह सोचें कि परवरिश, चुप्पी और भावनात्मक माहौल इंसान को किस तरह गढ़ते हैं, जिसे हम अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं।” देखिए ‘दो दुनिया एक दिल’, सोमवार से शुक्रवार रात 9:00 बजे, सिर्फ़ कलर्स पर।

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