गढ़वाल विवि के हैप्रेक संस्थान ने काली हल्दी पर किया शोध कार्य
पहाड़ी की मिट्टी और जलवायु काली हल्दी की पैदावार के लिए बेहतर

देहरादून । राज्य के किसानों की किस्मत चमकने वाली है। यह सब होगा काली हल्दी के जरिए, जिसके पहाड़ी क्षेत्र में उत्पादन को लेकर केंद्रीय गढ़वाल विश्व विद्यालय श्रीनगर का उच्च शिखरीय पादप कार्यिकी शोध केंद्र (हैप्रेक) में शोध हुआ है। जिसके परिणाम उम्मीद से बेहतर निकले हैं। अब गढ़वाल विश्व विद्यालय पहाड़ी क्षेत्रों में काली हल्दी की खेती को बढ़ावा देने की दिशा में काम करेगा। यह हल्दी सामान्य पीली हल्दी से कई गुना अधिक औषधीय गुणों से भरपूर होती है। जिस कारण यह पीली हल्दी की तुलना में पांच से छह गुना ज्यादा कीमत पर बाजार में बिकती है। किसान इसके उत्पादन से अच्छी आर्थिकी कमा सकते हैं ।
राज्य के किसानों के लिए काली हल्दी का उत्पादन कर उनकी आर्थिकी को मजबूत कर सकते हैं। जिसे देखते हुए केंद्रीय गढ़वाल विश्व विद्यालय श्रीनगर का उच्च शिखरीय पादप कार्यिकी शोध केंद्र ने काली हल्दी पर शोध कार्य किया है। इसके परिणाम काफी उत्साहित करने वाले हैं। शोध में पाया गया है कि पहाड़ की जलवायु और मिट्टी के अनुरूप काली हल्दी की अच्छी पैदावार किसान हासिल कर सकते हैं। पहाड़ी क्षेत्र में काली हल्दी की व्यवसायिक उत्पादन के जरिए किसान अपनी आर्थिकी मजबूत कर सकते हैं। इसके लिए गढ़वाल विवि का हैप्रेक संस्थान किसानों को अलग से प्रशिक्षण भी देगा।
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500-1000 रुपये प्रति किलो कीमत
काली हल्दी का वैज्ञानिक नाम करकुमा कैसिया है। इसे अंग्रेजी में ब्लैक करक्यूमा भी कहा जाता है, जो सामान्य पीली हल्दी की अपेक्षा अधिक औषधीय गुणों से भरपूर होती है। जिस कारण इसका उपयोग खाने के साथ कई दवाइयां बनाने में भी किया जाता है। अपने औषधीय गुणों के कारण इसकी बाजार में खासी डिमांड है। सामान्य पीली हल्दी जहां 60 से 100 रुपये प्रति किलो तक बाजार में बिकती है वहीं, काली हल्दी के दाम 500-1000 रुपये तक है। भारत में इसका उत्पादन पूर्व और उत्तरी पूर्वी राज्यों में किया जाता है। हैप्रिक अब इसके व्यवसायिक उत्पादन को पहाड़ में करने की दिशा में काम कर रहा है।
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इन राज्यों में होती है काली हल्दी
– असम
– ओडिशा
– पश्चिम बंगाल
– मध्यप्रदेश
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अपने औषधीय गुणों के लिए काली हल्दी की बाजार में खासी डिमांड है। इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स और एंटी इन्फ्लेमेटरी प्रॉपर्टीज पाई जाती हैं। जिसका नियमित सेवन करने से कई बीमारियों की चपेट में आने से खुद को बचाया जा सकता है। इसका उपयोग कई बीमारियां के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाई बनाने में भी किया जाता है।
नियमित सेवन के फायदे
– रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार
– सूजन कम करने में सहायक
– बदन दर्द में सेवन लाभदायक
– माइगे्रन और ऑस्टियोअर्थराइटिस में दर्द निवारक
– लिवर के लिए फायदेमंद
– मुंह के मुहासे और एक्जिमा में ठीक
– शरीर के घाव को भरने में मदद
– पेद दर्द और गैस्ट्रिक में फायदेमंद
– कैंसर से बचाव में लाभदायक
ऐसे करें पहचान
हल्दी एक जड़ है। सामान्य हल्दी की तरह काली हल्दी के पौधे होते है, इसका कंद भी सामान्य पीली हल्दी की तरह होता है। लेकिन इसका रंग गहरा भूरा, नीला और काला होता है। नीले और काले रंग की हल्दी सबसे बेहतर मानी जाती है।
अधिकारिक बयान
शोध में पाया गया है कि पहाड़ी क्षेत्र में काली हल्दी की अच्छी पैदावार हासिल की जा सकती है।इसके उत्पादन के लिए पहाड़ की मिट्टी और जलवायु दोनों ही अच्छी है। जिस कारण किसानों को काली हल्दी की व्यवसायिक पैदावार करने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।
डॉ. प्रदीप डोभाल, असिस्टेंट प्रोफेसर हैप्रेक
