नहीं रहे शूटर जसपाल राणा

देहरादून: शूटर जसपाल राणा नहीं रहे। 26 जून को अपना पचासवां जन्मदिन मानने से पहले ही जसपाल का निधन हो गया। स्वर्गीय जसपाल राणा और उनके परिवार का उत्तराखंड से बहुत गहरा नाता रहा है। उत्तरकाशी जिले में जन्मे जसपाल के पिता नारायण राणा सिक्योरिटी फोर्सज में रहे हैं और यहीं से उन्होंने जसपाल को शूटिंग की ओर मोड़ा। एशियन गेम में शूटिंग के क्षेत्र में भारत का परचम लहराने वाले जसपाल ने फिर पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा। द्रोणाचार्य अवार्ड, अर्जुन अवार्ड, पद्म अवार्ड.. देश के हर प्रतिष्ठित पुरस्कार से उनको नवाजा गया।

जसपाल अक्सर देहरादून स्थित अपने पिताजी की शूटिंग अकादमी में दिख जाते थे जहां वो युवाओं को शूटिंग के गुर सीखाते थे। जसपाल को देश के सबसे सफल पिस्टल कोच में गिना जाता है। उन्होंने कई भारतीय निशानेबाज तैयार किए। ओलंपिक में चमकने वाली शूटर मनु बाकर को भी जसपाल ने ही तराशा। जसपाल के पिता नारायण राणा उत्तराखंड की पहली नित्यानंद स्वामी सरकार में खेल मंत्री रहे। बीजेपी से जुड़े नारायण राणा 2002 का चुनाव हार गए। जसपाल ने भी राजनीति में हाथ आजमाया था। 2009 में उन्होंने तब कांग्रेस के कैंडिएडट रहे विजय बहुगुणा के खिलाफ टिहरी लोकसभा क्षेत्र से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा। चुनाव में बहुगुणा जीत गए। उत्तराखंड के 2012 विधानसभा चुनाव से पहले जसपाल ने एक बार फिर से बीजेपी के टिकट की दावेदारी की लेकिन इस बार बात बनी नहीं। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस ज्वाइन कर ली और कांग्रेस कैंपेनर के तौर पर सक्रिय रहे। हालांकि छोटी राजनीतिक पारी के बाद जसपाल ने शूटिंग पर फोकस किया और एक सफल कोच के तौर पर पहचान बनाई।

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