देहरादून । श्री ऋषि आश्रम मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास जगदाचार्य उपेंद्रानंद सरस्वती ने ईश्वर द्वारा सृष्टि की रचना कैसे हुई उसके बारे में वर्णन किया था मुनि जी की कथा का वर्णन करते हुए बताया कि मनुष्य जीवन बड़े ही सौभाग्य से मिलता है इस जीवन को हमें बहुत ही मर्यादित तरीके से जीना चाहिए कभी अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं करना चाहिए ऐसी भाषा का प्रयोग नहीं करना चाहिए जिस किसी का हृदय व्यथित हो। इस जीवन के माध्यम से हम अपना तो जीवन सवारी सकते हैं हम लोग बहुत सारे दूसरे लोगों कभी भला कर सकते है मनुष्य ही एक मात्र ऐसा जीव है जिसको ईश्वर ने सोचने समझने गलत और सही को समझने के लिए बुद्धि दी है। भागवत कथा में सती चरित्र का वर्णन करते हुए कथा व्यास जी ने बताया कि कैसे सती ने बुद्धि और अपनी समझ से कैसे अपने पति के प्राणों की रक्षा की और महिलाओं को यह संदेश दिया कि अगर आप सही हैं और पतिव्रता नारी है तो अपने पति के जीवन में आने वाली कठिनाइयां तो बहुत दूर की बात है उनके प्राणों की भी रक्षा कर सकती है आगे कथा में व्यास जी ने मनु जी की कन्याओं का उनके पुत्रों का वर्णन किया और ध्रुव की कथा का विस्तार से वर्णन किया ।
इस मौके पर आश्रम के प्रबंधक एवं संचालक महामंडलेश्वर श्री विद्या चैतन्य जी महाराज, महेश चंद गुप्ता, मनमोहन शर्मा, यश गर्ग, चंद्रवीर गायत्री, भगवान स्वरूप अग्रवाल, सत्य प्रकाश गोयल, बालेश गुप्ता, विमला गॉड, पुष्पा गायत्री, कंचन आनंद, मीना सिंघल प्राची मित्तल आदि उपस्थित रहे।

