देहरादून । रविवार को दून के एक होटल में रितु गुजराल फाउंडेशन के तत्वावधान में महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी ने द ज्यूरिस्ट कॉन्क्लेव का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा,सभी न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं और न्याय क्षेत्र से जुड़े सभी विद्वानों को मानवीय और संवेदनाओं के आधार पर भी पीड़ितों के मामलों को देखने की आवश्यकता है। उन्होंने न्याय तथा कानून को अलग-अलग कर देखने की आवश्यकता पर बल दिया। रितु गुजराल फाउंडेशन द्वारा विधि पाठशाला, यूथ संकीर्तन जैसे आयाम पहले से चलते आ रहे हैं, जबकि रविवार को इसमें तीसरे आयाम द ज्यूरिस्ट कान्क्लेव का उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तराखंड हाईकोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति राजेश टंडन ने की। जो कि रितु गुजराल फाउंडेशन के संरक्षक भी हैं। फाउंडेशन की अध्यक्ष रितु गुजराल ने बताया कि इस कॉन्क्लेव की मूल धारणा समाज एवं विधि के ज्वलंत विषयों पर न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं एवं अन्य सभी विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श कर हल निकालकर उन्हें सरकार एवं नीति निर्माताओं को भेजना है। कार्यक्रम में देहरादून के जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रेम सिंह खिमाल को उनके सेवानिवृत होने पर सम्मानित कर विदाई भी दी गयी। कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश महामंत्री दीप्ति रावत भारद्वाज, पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश वी.के. माहेश्वरी,पूर्व पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार, मुख्य वक्ता के तौर पर अधिवक्ता आर.एस. राघव जी,जिला एवं सेवा प्राधिकरण सचिव सीमा डुंगराकोटी जी एवं अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी चतुर्थ शाहिस्ता बानो जी उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त बार काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष राकेश गुप्ता, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल शर्मा, बार एसोसिएशन के सचिव कपिल अरोड़ा, पूर्व राज्य सूचना आयुक्त विवेक शर्मा, एपीओ भानू पृताप बिष्ट, अधिवक्ता अनुराग गुप्ता, अधिवक्ता विक्रम आदित्य सिंह, अधिवक्ता प्रतीक खांडा, देवभूमि विश्वविद्यालय के लॉ विभाग के डीन प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार दीक्षित, सिद्धार्थ लॉ कॉलेज के प्राचार्य शराफत अली, यूपीएस विश्वविद्यालय के लॉ विभाग के एचओडी डॉ. नवनीत तथा नरेश गुप्ता एवं अन्य न्यायविद, अधिवक्तागण, शिक्षाविद् एवं विशिष्ट अतिथिगण कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

