पंडित गोविंद बल्लभ पंत जी की 139वीं जयंती पर पंतनगर विश्वविद्यालय ने किया श्रद्धापूर्वक स्मरण

पंतनगर। भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत जी की 139वीं जयंती के अवसर पर नाहेप परिसर में उन्हें श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में कुलपति डा. शिवेन्द्र कुमार कश्यप के साथ कुलसचिव, महाविद्यालय के अधिष्ठाता, निदेशकों, संकाय सदस्यों, विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों द्वारा पंडित गोविंद बल्लभ पंत जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पंतनगर विश्वविद्यालय के कुलपति डा. शिवेंद्र कुमार कश्यप ने कहा कि पंडित गोविंद बल्लभ पंत जी ने इस विश्वविद्यालय की स्थापना में महत्वपूर्ण एवं अग्रणी भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि वर्ष 1960 में पंतनगर में विश्वविद्यालय की स्थापना के पीछे पंडित गोविंद बल्लभ पंत जी की दूरदृष्टि एवं प्रेरणा महत्वपूर्ण रही। उस समय देश में उच्च कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में एक नए प्रकार के संस्थान की आवश्यकता महसूस की जा रही थी और पंडित गोविंद बल्लभ पंत जी के प्रयासों से पंतनगर में इस विश्वविद्यालय की नींव रखी गई। कुलपति ने कहा कि पंडित गोविंद बल्लभ पंत जी का व्यक्तित्व अत्यंत विराट एवं प्रेरणादायी था। उन्होंने एक छोटे से गांव से अपनी जीवन-यात्रा प्रारंभ कर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि यदि व्यक्ति में क्षमता, संकल्प और कुछ कर गुजरने की दृढ़ इच्छा हो, तो वह किसी भी चुनौती को पार कर आगे बढ़ सकता है। डा. कश्यप ने कहा कि पंडित गोविंद बल्लभ पंत जी की प्रेरणा से स्थापित यह विश्वविद्यालय आज भी निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है तथा वर्तमान चुनौतियों का सामना करते हुए कृषि शिक्षा, अनुसंधान एवं प्रसार के क्षेत्र में अपनी प्रासंगिकता सिद्ध कर रहा है। पंतनगर विश्वविद्यालय अपने संस्थापक की दूरदृष्टि एवं मूल उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। बदलते समय और नई चुनौतियों के बीच विष्वविद्यालय को अपनी मूल दिशा से विचलित हुए बिना पंडित गोविंद बल्लभ पंत जी के आदर्शों एवं मूल्यों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि पंडित गोविंद बल्लभ पंत जी की जयंती उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व से जुड़ने तथा उनकी स्मृतियों को संजोने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने पंडित गोविंद बल्लभ पंत जी की प्रतिमा की विशेषता का उल्लेख करते हुए बताया कि यह प्रतिमा प्रसिद्ध मूर्तिकार श्री राम वी. सुतार द्वारा निर्मित है। कुलपति ने कहा कि पंडित गोविंद बल्लभ पंत ने जिस प्रकार अपने जीवन में अपनी प्रासंगिकता एवं क्षमता को सिद्ध किया, उसी प्रकार पंतनगर विश्वविद्यालय भी निरंतर बदलते परिवेश में अपनी प्रासंगिकता सिद्ध कर रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अपने संस्थापक के आदर्शों से प्रेरणा लेते हुए शिक्षा, अनुसंधान, प्रसार एवं समाजोपयोगी कार्यों के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ता रहेगा।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए हल्दी क्षेत्र में 65 एकड़ भूमि पर गो-संरक्षण केंद्र की स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई। हल्दी रेलवे स्टेशन के समीप प्रस्तावित गो-संरक्षण केंद्र के लिए भूमि पूजन भी पंडित गोविंद बल्लभ पंत जयंती के अवसर पर किया गया। कुलपति ने कहा कि यह पहल विश्वविद्यालय की सामाजिक जिम्मेदारी एवं पशुधन संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने विष्वास व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय पंडित गोविंद बल्लभ पंत के आदर्शों से प्रेरणा लेकर भविष्य में भी इसी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ता रहेगा।
इस अवसर पर महामहिम राज्यपाल उत्तराखंड ले ज गुरमीत सिंह, केंद्रीय कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री  शिवराज सिंह चौहान, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के संदेशों को विश्वविद्यालय के विभिन्न महाविद्यालयों के अधिष्ठाताओं द्वारा उपस्थितजनों के समक्ष पढ़कर सुनाया गया। ई.मेल चित्र सं.1ः पंडित पंत जी की प्रतिमा पर माल्यापर्ण करते विश्वविद्यालय के कुलपति डा. शिवेन्द्र कुमार कश्यप।

2- विश्वविद्यालय की भूमि पर ‘निराश्रित गोवंश संवर्धन एवं अनुसंधान प्रकल्प‘ का भूमि पूजन
पंतनगर। 10 सितम्बर 2026। विश्वविद्यालय में गोवंश संरक्षण के उद्देश्य से ‘निराश्रित गोवंश संवर्धन एवं अनुसंधान प्रकल्प’ के भूमि पूजन का कार्यक्रम विश्वविद्यालय फार्म के हल्दी प्रक्षेत्र के ‘सी’ खण्ड़ में कुलपति डा. शिवेन्द्र कुमार कश्यप, मुख्य अतिथि अजीत मोहापात्रा, अखिल भारतीय गौ सेवा प्रमुख, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विशिष्ट अतिथि डा. शैलेन्द्र, प्रांत प्रचारक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, डा. राजेन्द्र अंतवाल, अध्यक्ष उत्तराखण्ड गौ सेवा आयोग, उत्तराखण्ड सरकार की गरिमामयी उपस्थिति में सम्पन्न हुआ।
भूमि पूजन के दौरान कुलपति ने कहा कि गाय भारतीय संस्कृति और सभ्यता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्राचीनकाल में ही गाय को माता का दर्जा दिया गया है। इसे गौ माता कहा जाता है क्योंकि यह मानव जीवन के लिए अनेक प्रकार से उपयोगी है। गाय के दूध, गोबर और गौमूत्र से औषधीय और कृषि उपयोग इसे और अधिक महत्वपूर्ण बनाते हैं। मुख्य अतिथि अजीत मोहापात्रा ने बताया कि गाय का दूध पोषण से भरपूर होता है और बच्चों से लेकर वृद्धा तक के लिए लाभकारी होता है। आज की स्थिति में गायों की स्थिति चिन्ताजनक है। वर्तमान परिवेश में गौ संरक्षण का महत्व बहुत बढ़ गया है। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के निदेशक शोध डा. एस.के. वर्मा, कार्यवाहक मुख्य महाप्रबन्धक, फार्म डा. अमित भटनागर, सहायक निदेशक फार्म डा. अजय प्रभाकर एवं अधिष्ठातागण उपस्थित थे।

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