चार दिवसीय प्रवास पर देवी मां कालिंका पहुंची अपने मायके पनाई सेरा मांडा मंण्डप में

चमोली। चार दिवसीय प्रवास पर क्षेत्र की अधिष्ठात्री देवी मां कालिंका अपने भाईयों रावल देवता के साथ अपने मायके के पनाई सेरा स्थित माण्डा मंडप में पहुंचकर कालिंका देवी मंदिर में विराजमान हो गई। कालिंका देवी महोत्सव के इस अवसर पर पूरा वातावरण देवी मां के जयकारों से गुंजायमान रहा। बीते रोज दोपहर बाद रावलनगर गांव से देवी मां के दो भाईयों के साथ श्रद्धालुगण देवी मां को मायके लाने के लिये बाजे गाजे के साथ ससुराल स्थित मंदिर भट्टनगर गये जहां मंदिर के पुजारी राधा बल्लभ थपलियाल द्वारा देवी मां का श्रृंगार व विधि-विधान के साथ पूजा करते हुऐ देवी मां के भाइयों रावल के साथ मायके के लिये विदा किया गया। मायका आने के दौरान मां कालिंका देवी का रास्ते में जगह-जगह मायके पक्ष की ध्याणियों व देवी भक्तों द्वारा पुष्प वर्षा के साथ भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान मायका पक्ष के सात गांवों पनाई तल्ली, पनाई मल्ली, रावल तल्ला, राललनगर मल्ला, शैल बसन्तपुर, बंदरखंड व भट्टनगर व धारी नगर वालों ने कालिंका महोत्सव में शामिल होकर अपनी आराध्य देवी मां कालिंका के मायका प्रवास उत्सव मांगल गीत व देवी जागर गाकर को भव्य बना दिया गया। मंदिर में विराजमान होने के बाद पंडित
नागेन्द्र शास्त्री, अनुसूया प्रसाद जोशी, गिरीश जोशी, बंशीधर शैली, आशीष शैली ने देर रात तक विधि-विधान के साथ देवी की पूजा अर्चना की गई। इस दौरान मंदिर में देवी दर्शनों को भारी भीड़ उमड़ी रही। इस अवसर पर मंदिर समिति के अध्यक्ष जगदीश कनवासी, रघुनाथ सिंह बिष्ट, महेंद्र सिंह बिष्ट, उमराव सिंह नेगी, राकेश लिंगवाल, भीम सिंह गुसाईं, देवेन्द्र नेगी, विजय बिष्ट, चंद्र सिंह चौहान, जयपाल बिष्ट, सुरेन्द्र सिंह मल्ल के अलावा स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

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