देहरादून। दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र की ओर से केन्द्र के सभागार में शुक्रवार को लेखक अरविंदर सिंह की पुस्तक ‘जयप्रकाश नारायण : द पीपुल्स लीडर’ का लोकार्पण एवं उस पर एक परिचर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में वक्ताओं ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण के राजनीतिक जीवन, वैचारिक प्रतिबद्धता, लोकतंत्र के प्रति उनके योगदान और सम्पूर्ण क्रांति के विचारों पर चर्चा की। इस अवसर पर साहित्य, इतिहास, राजनीति और समसामयिक विषयों में रुचि रखने वाले अनेक लोग उपस्थित रहे।

पुस्तक पर आयोजित परिचर्चा में दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के मानद निदेशक एन. रविशंकर, उत्तराखण्ड के पूर्व पुलिस महानिदेशक एवं लेखक आलोक बी. लाल तथा पायनियर पत्र की विशेष संवाददाता अनुपमा खन्ना ने भाग लिया। इसमें वक्ताओं ने जयप्रकाश नारायण के व्यक्तित्व और उनके राजनीतिक दर्शन के विभिन्न पहलुओं पर विश्लेषणात्मक चर्चा की गयी ।
वक्ताओं ने कहा कि जयप्रकाश नारायण बीसवीं सदी के भारत के महत्वपूर्ण राजनीतिक नेताओं में थे। वे अपने सिद्धांतों और नैतिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहे तथा राजनीतिक सत्ता के आकर्षण से दूर रहकर देश और समाज के व्यापक हित में सक्रिय रहे। उन्होंने अपने विचारों, जनसंपर्क और आंदोलनों के माध्यम से भारतीय राजनीति को प्रभावित किया। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि सिद्धांतनिष्ठ नेतृत्व और नैतिक साहस के बल पर देश की राजनीतिक दिशा को प्रभावित किया जा सकता है।
नियोगी बुक्स द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक ‘पायनियर्स ऑफ मॉडर्न इंडिया’ शृंखला का हिस्सा है। इसमें जयप्रकाश नारायण की जीवन यात्रा के साथ उनके समाजवादी विचारों, स्वतंत्रता संग्राम में भागीदारी, भूदान आंदोलन से जुड़ाव और सम्पूर्ण क्रांति की अवधारणा को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है।
वक्ताओं ने यह भी कहा कि भारतीय राजनीति के महत्वपूर्ण दौर में उनकी भूमिका और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए किए गए प्रयास भी पुस्तक के प्रमुख विषय हैं।
परिचर्चा में लेखक अरविंदर सिंह के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा गया कि उन्होंने जयप्रकाश नारायण के जीवन और योगदान को नई पीढ़ी के पाठकों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण काम किया है। लेखक इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई पर भी जीवनी लिख चुके हैं। वक्ताओं के अनुसार, ऐसी पुस्तकें आधुनिक भारत के राजनीतिक इतिहास, उसके प्रमुख व्यक्तित्वों और लोकतांत्रिक विकास की प्रक्रिया को समझने में मदद करती हैं।
चर्चा के दौरान इस बिन्दु को भी रेखांकित किया गया कि जयप्रकाश नारायण के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। सार्वजनिक जीवन में नैतिकता, सत्ता की जवाबदेही, नागरिक अधिकारों और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका जैसे विषयों पर उनके विचार वर्तमान समाज को दिशा देने में सहायक हो सकते हैं। उनका जीवन बताता है कि लोकतंत्र केवल शासन व्यवस्था नहीं, बल्कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी और सार्वजनिक जीवन में मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता से मजबूत होता है।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने पुस्तक और चर्चा के माध्यम से आधुनिक भारत के राजनीतिक इतिहास तथा जयप्रकाश नारायण के योगदान को समझने में रुचि दिखाई। चर्चा के बाद उपस्थित लोगों ने सवाल जबाब भी किये
दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य पुस्तकों के माध्यम से गंभीर विषयों पर संवाद को प्रोत्साहित करना और पाठकों को विचार-विमर्श के लिए साझा मंच उपलब्ध कराना रहा।
दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र पठन-पाठन, शोध और ज्ञान के प्रसार के साथ साहित्य, इतिहास, समाज, संस्कृति तथा समसामयिक विषयों पर व्याख्यान, पुस्तक लोकार्पण और परिचर्चाओं का आयोजन करता है। केन्द्र का प्रयास है कि लेखक, बुद्धिजीवी, शोधार्थी, विद्यार्थी और आम नागरिक एक साथ आकर विचारों का आदान-प्रदान कर सकें। यह आयोजन भी इसी उद्देश्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण गतिविधि रहा।
