देहरादून। अकेशिया पब्लिक स्कूल में बुधवार को कला एवं शिल्प प्रदर्शनी का भव्य आयोजन किया गया। प्रदर्शनी का शुभारंभ विद्यालय के चेयरमैन मनमीत सिंह ढिल्लों ने दीप प्रज्वलित कर किया। इसके पश्चात उन्होंने प्रदर्शनी में विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई विभिन्न कलाकृतियों, परियोजनाओं एवं कार्यशील मॉडलों का अवलोकन किया और बच्चों की रचनात्मकता की सराहना की।

प्रदर्शनी में सर्वप्रथम गढ़वाल क्षेत्र की संस्कृति, परंपराओं एवं खानपान को दर्शाने वाले स्टॉल ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, गोवा सहित विभिन्न राज्यों के स्टॉल लगाए गए, जिनके माध्यम से विद्यार्थियों ने अपने-अपने राज्यों की संस्कृति, परंपराओं, रहन-सहन एवं खानपान की विशेषताओं से अतिथियों और अभिभावकों को परिचित कराया। विद्यार्थियों ने वेस्ट मटेरियल का रचनात्मक उपयोग करते हुए सुंदर एवं आकर्षक कलाकृतियाँ तैयार की थीं। विभिन्न विषयों पर आधारित कार्यशील मॉडलों ने विद्यार्थियों की वैज्ञानिक सोच, नवाचार एवं विषयों की व्यावहारिक समझ को प्रदर्शित किया। प्रदर्शनी में विद्यार्थियों और शिक्षकों की मेहनत, लगन एवं रचनात्मकता स्पष्ट रूप से दिखाई दी। प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों द्वारा तैयार किया गया फैयरीलैण्ड’ विशेष आकर्षण का केंद्र रहा, जिसकी सुंदर प्रस्तुति ने सभी को प्रभावित किया।
प्रदर्शनी के दौरान मेहंदी, चित्रकला सहित विभिन्न गतिविधियों का भी आयोजन किया गया, जिनमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बच्चों की प्रतिभा और उनके द्वारा प्रस्तुत रचनात्मक कार्यों को देखकर अभिभावक भी बेहद प्रसन्न नजर आए। विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों ने इस प्रदर्शनी का भरपूर आनंद लिया। इस अवसर पर विद्यालय की प्रधानाचार्या पूजा मारिया ने विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अभिभावकों को संबोधित करते हुए बच्चों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने इस प्रकार के आयोजनों को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, आत्मविश्वास, रचनात्मकता एवं व्यावहारिक ज्ञान को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण बताया तथा सभी प्रतिभागियों को भविष्य में भी इसी उत्साह के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम में विद्यालय की निदेशक रुपिंदर कौर, रामनदीप कौर एवं जसनदीप सिंह ढिल्लों, ममता रावत सहित विद्यालय के समस्त शिक्षकगण उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त डी.एस.आर. के चेयरमैन सुनील दीक्षित एवं समाजसेवी मनोज तलियान ने भी अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
प्रदर्शनी ने यह संदेश दिया कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि रचनात्मक गतिविधियों, प्रयोगों और सांस्कृतिक अनुभवों के माध्यम से विद्यार्थियों के ज्ञान एवं व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास भी किया जा सकता है।
