बस्ती बचाओ आंदोलन और संयुक्त परिषद ने सौंपा ज्ञापन
देहरादून : रिस्पना-बिंदाल एलिवेटेड रोड परियोजना को निरस्त करने और आंदोलनकारियों का पुनः चिन्हीकरण करने की मांग को लेकर बस्ती बचाओ आंदोलन और उत्तराखंड आंदोलनकारी संयुक्त परिषद जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा।
प्रतिनिधि अनंत प्रकाश ने कहा कि एलिवेटेड रोड परियोजना से हजारों परिवारों के बेघर होने का खतरा है। यह परियोजना मुख्यमंत्री के उस आश्वासन के विपरीत है, जिसमें बस्तियों को न हटाने की बात कही गई थी।
प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित सड़क से रिस्पना और बिंदाल नदियों के प्राकृतिक बहाव पर भी असर पड़ेगा, जिससे भविष्य में बाढ़ और जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। साथ ही हजारों पेड़ों की कटाई से पर्यावरण को भी गंभीर नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर विस्थापन उचित नहीं है। इसके बजाय शहर की आंतरिक सड़कों, पुलों के पुनर्निर्माण और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता है।
इसके साथ ही परिषद ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन के उन आंदोलनकारियों के पुनः चिन्हीकरण की मांग की, जो अब तक विभिन्न कारणों से सरकारी लाभ से वंचित हैं। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि राज्य स्थापना के रजत जयंती वर्ष को देखते हुए जिला स्तर पर एक विशेष समिति बनाकर छूटे आंदोलनकारियों को सुनवाई का अवसर दिया जाए।
ज्ञापन देने वालों में अनंत आकाश, नवनीत गुसाईं, लेखराज, बालेश बबानिया, भगवंत पयाल, रविंद्र नौडियाल, अभिषेक भंडारी, हिमांशु चौहान, एडवोकेट अनुराधा मंदोला, प्रभात डंडरियाल, सुनीता चौहान, रामपाल सिंह और अमित सहित लोग मौजूद रहे।

