देहरादून । बदलती वैश्विक एवं सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा प्रणाली को पुनर्परिभाषित करने की दिशा में वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, देहरादून द्वारा 05 मई, 2026 को राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 (NEP-2020) विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य विभिन्न संस्थानों से जुड़े शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं एवं संकाय सदस्यों के मध्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के प्रति जागरूकता विकसित करना तथा इसकी समग्र एवं व्यावहारिक समझ को सुदृढ़ करना रहा। कार्यशाला में कुल 87 प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता की।

कार्यशाला का शुभारम्भ विश्वविद्यालय की माननीय कुलपति प्रो. तृप्ता ठाकुर, विशिष्ट अतिथि प्रो. के. के. पंत (निदेशक, आईआईटी रुड़की), मुख्य वक्ता डॉ. शिवकुमार शर्मा (राष्ट्रीय संगठन सचिव, विज्ञान भारती), श्री विवेकानन्द पाई (महासचिव, विज्ञान भारती) तथा प्रो. हेमवती नंदन द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।
अपने स्वागत संबोधन में कुलपति प्रो. तृप्ता ठाकुर ने मुख्य अतिथि माननीय शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत एवं उपस्थित सभी विशिष्ट अतिथियों एवं विशेषज्ञों का स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 शिक्षा प्रणाली को मूलभूत स्तर से वैश्विक दृष्टिकोण तक जोड़ने का एक सशक्त प्रयास है। विश्वविद्यालय द्वारा भी इस नीति के अनुरूप पाठ्यक्रमों का पुनर्संरचना की जा रही है, जिससे विद्यार्थियों को केवल डिग्री ही नहीं, बल्कि रोजगारोन्मुख एवं कौशल-आधारित शिक्षा प्राप्त हो सके।
उन्होंने उत्तराखंड के पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि डिजिटल माध्यमों के विस्तार से शिक्षा की पहुँच सुदृढ़ हो रही है। NEP-2020 बहुविषयक दृष्टिकोण, लचीली शिक्षा प्रणाली, छात्र-केंद्रित अधिगम, Multiple Entry-Exit System तथा Academic Bank of Credits जैसे प्रावधानों के माध्यम से विद्यार्थियों को व्यापक अवसर प्रदान करती है। तकनीकी विश्वविद्यालय होने के नाते संस्थान द्वारा कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स एवं इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी उभरती तकनीकों को पाठ्यक्रम में समाहित किया जा रहा है।
मुख्य वक्ता डॉ. शिवकुमार शर्मा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के निर्माण की प्रक्रिया से लेकर उसके प्रभावी क्रियान्वयन तक का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने भारत-केंद्रित शिक्षा प्रणाली की आवश्यकता पर बल देते हुए जानकारी को ज्ञान एवं ज्ञान को विवेक में परिवर्तित करने की अवधारणा को रेखांकित किया।
श्री विवेकानन्द पाई ने भारतीय ज्ञान परंपरा एवं ऐतिहासिक वास्तुकला पर प्रकाश डालते हुए नालंदा विश्वविद्यालय की गौरवशाली विरासत का उल्लेख किया। उन्होंने ‘Learning by Doing’ की अवधारणा, इंटर्नशिप के महत्व तथा बहुविषयक एवं समग्र शिक्षा दृष्टिकोण को वर्तमान समय की आवश्यकता बताया।
विशिष्ट अतिथि प्रो. के. के. पंत ने आधुनिक तकनीकी शिक्षा प्रणाली पर अपने विचार रखते हुए शिक्षण में नवाचार एवं Flipped Teaching Approach को अपनाने पर बल दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को स्टार्टअप, एमएसएमई एवं उद्योगों से जुड़कर व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया तथा ई-वेस्ट प्रबंधन, बायोमास, पर्यटन, सतत कृषि एवं नवाचार जैसे क्षेत्रों में कार्य करने हेतु प्रोत्साहित किया।
कार्यक्रम के विभिन्न तकनीकी सत्रों में प्रो. हेमवती नंदन (भौतिकी विभाग, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर), प्रो. एच. सी. पुरोहित (डीन, दून विश्वविद्यालय, देहरादून) एवं डॉ. गुरुराज मिर्ले विश्वनाथ (इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग, आईआईटी कानपुर) सहित विशेषज्ञों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के विभिन्न आयामों पर विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किए।
अंत में डॉ. मनोज कुमार पांडा, निदेशक WIT द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. राजेश उपाध्याय, वित्तीय नियंत्रक श्री विक्रम जंतवाल सहित विश्वविद्यालय के अधिकारीगण, संकाय सदस्य एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।कार्यक्रम का सफल समन्वयन प्रो. के. सी. मिश्रा द्वारा किया गया।
