लोकायुक्त के 9 कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी

हाईकोर्ट ने दी राहत
नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय नैनीताल मे गौलापार निवासी रवि शंकर जोशी द्वारा, लोकायुक्त की नियुक्ति की मांग को लेकर, दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खण्डपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि सर्च कमेटी का गठन होने के बाद लोकायुक्त की नियुक्ति और उसके सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया में क्या प्रगति हुई? छः सप्ताह के भीतर कोर्ट को अवगत कराएं।
साथ मे कोर्ट ने लोकायुक्त कार्यालय के कार्यरत 9 कर्मचारियों को वेतन का भुगतान करने को भी कहा है। कोर्ट के आदेश पर उनको वेतन का भुगतान नहीं किया जा रहा था। आज कोर्ट ने अपने पूर्व के आदेश को संसोधित करते हुए यह निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 6 सप्ताह बाद की तिथि नियत की है।
आज हुई सुनवाई पर राज्य सरकार की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि कोर्ट के आदेश का अनुपालन करते हुए सरकार ने 4 जून को सर्च कमेटी का गठन कर लिया गया है। जिसकी अध्यक्षता उच्च न्यायलय के सेवानिवृत्त न्यायधीश आलोक कुमार वर्मा कर रहे हैं। यह कमेटी अब लोकायुक्त और उसके सदस्यों का चयन करेगी। साथ मे सरकार की तरफ से यह भी कहा गया कि कोर्ट के आदेश पर लोकायुक्त कार्यालय में कार्यरत 9 कर्मचारियों को वेतन का भुगतान नहीं हो पाया है, इसलिए उन्हें वेतन देने के लिए पूर्व के आदेश को संसोधित किया जाये, ताकि उन्हें समय पर वेतन का भुगतान हो सके।
मामले के अनुसार जनहित याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार ने अभी तक लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं की, जबकि संस्थान के नाम पर वार्षिक 2 से 3 करोड़ रुपए खर्च हो रहा है। जनहित याचिका में कहा गया है कि कर्नाटक में व मध्य प्रदेश में लोकायुक्त द्वारा भ्रष्टाचार के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की जा रही है, परंतु उत्तराखंड में तमाम घोटाले हो रहे हैं। हर एक छोटे से छोटा मामला उच्च न्यायालय में लाना पड़ रहा है।
जनहित याचिका में यह भी कहा गया है कि वर्तमान में राज्य की सभी जांच एजेंसी सरकार के अधीन है। जिसका पूरा नियंत्रण राज्य के राजनैतिक नेतृत्व के हाथों में है। वर्तमान में उत्तराखंड राज्य में कोई भी ऐसी जांच एजेंसी नही है “जिसके पास यह अधिकार हो की वह बिना शासन की पूर्वानुमति के, किसी भी राजपत्रित अधिकारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार का मुकदमा पंजिकृत कर सके।
स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के नाम पर प्रचारित किया जाने वाला विजिलेंस विभाग भी राज्य पुलिस का ही हिस्सा है। जिसका सम्पूर्ण नियंत्रण पुलिस मुख्यालय, सतर्कता विभाग या मुख्यमंत्री कार्यालय के पास ही रहता है। एक पूरी तरह से पारदर्शी, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच व्यवस्था राज्य के नागरिकों के लिए कितनी महत्वपूर्ण है। इसलिए रिक्त पड़े लोकायुक्त की नियुक्ति शीघ्र की जाये। जिससे कि राज्य में हो रहे करप्शन पर रोक लग सके। उनके मामलों की सुनवाई लोकायुक्त के वहां होगी। न्यायलयों का कार्यभार में कमी आएगी। यह पद वर्ष 2013 से खाली पड़ा है।

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