नर्सिंग एकता मंच का आंदोलन 200वें दिन में प्रवेश, हल्द्वानी में भी फूटा नर्सिंग समुदाय का आक्रोश

देहरादून। नर्सिंग भर्ती को लेकर पिछले 200 दिनों से लगातार संघर्ष कर रहे बेरोजगार नर्सिंग अभ्यर्थियों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। सरकार की लगातार अनदेखी और बार-बार मिले आश्वासनों के बावजूद भर्ती प्रक्रिया पर कोई ठोस निर्णय न होने से नर्सिंग समुदाय में भारी आक्रोश व्याप्त है।
इसी आक्रोश के चलते आज से हल्द्वानी के तिकोनिया पार्क में भी नर्सिंग भर्ती को पूर्व की भांति वर्षवार आयोजित करने की मांग को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया गया है। कुमाऊं मंडल के सभी जिलों से पहुंचे सैकड़ों नर्सिंग अभ्यर्थियों और नर्सिंग कर्मियों ने सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करते हुए अपनी आवाज बुलंद की।
अभ्यर्थियों ने कहा कि वे पिछले कई वर्षों से नर्सिंग की पढ़ाई और प्रशिक्षण पूरा कर रोजगार की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन सरकार की गलत नीतियों और उदासीनता के कारण उनका भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है। एक ओर प्रदेश के अस्पताल नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशिक्षित और योग्य नर्सिंग अभ्यर्थी बेरोजगारी का दंश झेलने को मजबूर हैं।
आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार ने कई बार सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन देकर नर्सिंग अभ्यर्थियों को ठगा गया। 200 दिनों से अधिक समय से जारी धरना, प्रदर्शन और आमरण अनशन के बावजूद सरकार का संवेदनहीन रवैया युवाओं के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है।
नर्सिंग एकता मंच ने चेतावनी दी है कि यदि नर्सिंग भर्ती को पूर्व की भांति वर्षवार करने, रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने और लंबित मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को पूरे प्रदेश में और अधिक व्यापक एवं निर्णायक रूप दिया जाएगा। मंच ने स्पष्ट कहा कि अब नर्सिंग समुदाय केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होगा, बल्कि अपने अधिकार और रोजगार के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ने को तैयार है।
मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि हल्द्वानी में आंदोलन की शुरुआत इस बात का संकेत है कि सरकार यदि अब भी नहीं जागी, तो गढ़वाल और कुमाऊं दोनों मंडलों में आंदोलन और तेज किया जाएगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
नर्सिंग एकता मंच ने सरकार से मांग की है कि युवाओं के भविष्य के साथ हो रहा अन्याय तत्काल बंद किया जाए, नर्सिंग भर्ती प्रक्रिया को शीघ्र प्रारंभ किया जाए तथा स्वास्थ्य विभाग में रिक्त पदों पर नियुक्तियां कर बेरोजगार नर्सिंग अभ्यर्थियों को न्याय दिया जाए।
“200 दिन का संघर्ष यह साबित करता है कि नर्सिंग समुदाय अब अपने अधिकारों के लिए किसी भी स्तर तक जाने को तैयार है। यदि सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया, तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और अधिक व्यापक, निर्णायक और ऐतिहासिक रूप लेगा।”

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