इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स ने ज्वेलर्स एसोसिएशन के सहयोग से हरिद्वार में ‘स्वास्थ्य पर चर्चा’ का आयोजन किया

प्रिवेंटिव हैल्थकेयर के बारे में जागरुकता बढ़ाई
हरिद्वार । इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स, नई दिल्ली ने ज्वेलर्स एसोसिएशन, हरिद्वार के सहयोग से ‘स्वास्थ्य पर चर्चा’ का आयोजन किया। यह एक इंटरैक्टिव हैल्थ अवेयरनेस प्रोग्राम है, जिसका उद्देश्य प्रिवेंटिव हैल्थकेयर, अरली डायग्नोसिस और समय पर इलाज को बढ़ावा देना है।
इस अभियान के अंतर्गत इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स के मुख्य विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य की गंभीर समस्याओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। सत्र में रोगों के लक्षणों को तुरंत पहचानने, नियमित तौर से हैल्थ स्क्रीनिंग करवाने और समय पर इलाज करवाने के महत्व पर जोर दिया गया। इस चर्चा में ज्वेलर्स एसोसिएशन, हरिद्वार के सदस्यों और स्थानीय लोगों ने हिस्सा लिया और उपस्थित विशेषज्ञों से बातचीत की।
चर्चा में हिस्सा लेने वाले विशेषज्ञ पैनल में डॉ. राजीव राजपूत, सीनियर कंसल्टैंट, कार्डियोलॉजी; डॉ. निखिल अग्रवाल, सीनियर कंसल्टैंट, जीआई एवं एचपीबी सर्जिकल ऑन्कोलॉजी; डॉ. पाखी अग्रवाल, सीनियर कंसल्टैंट, गायने ऑन्कोलॉजी; डॉ. गौरव त्यागी, सीनियर कंसल्टैंट, न्यूरोसर्जरी; डॉ. अंशुल वर्मा, सीनियर कंसल्टैंट, जीआई एवं एचपीबी सर्जिकल ऑन्कोलॉजी और डॉ. हर्षित गर्ग, सीनियर कंसल्टैंट, यूरो-ऑन्कोलॉजी शामिल थे।
डॉ. राजीव राजपूत, सीनियर कंसल्टैंट, कार्डियोलॉजी, इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल, दिल्ली ने कहा, ‘‘हृदय रोग चुपचाप बढ़ते चले जाते हैं। कई लोगों को तब तक कोई प्रत्यक्ष लक्षण प्रकट नहीं होते हैं, जब तक हार्ट की कोई बड़ी दुर्घटना न हो जाए। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल और धूम्रपान से खतरा बढ़ जाता है। इसलिए नियमित तौर से हैल्थ स्क्रीनिंग कराना जरूरी है। दूसरी तरफ, संतुलित आहार, नियमित शारीरिक व्यायाम, स्ट्रेस मैनेजमेंट और तम्बाकू सेवन से परहेज हृदय को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। समाज में जागरुकता बढ़ाने से लोगों को खतरों को समय पर पहचानने और इलाज कराने में मदद मिलती है।
डॉ. निखिल अग्रवाल, सीनियर कंसल्टैंट, जीआई एवं एचपीबी सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल, दिल्ली ने कहा, ‘‘लिवर, पैन्क्रियाज, गॉल ब्लैडर और डाइजेस्टिव ट्रैक्ट के कैंसर बढ़ते जा रहे हैं, पर जब तक मरीज डॉक्टर के पास पहुँचते हैं, उनकी बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है। एसिडिटी बने रहने, निगलने में कठिनाई होने, बिना वजह वजन के घटने और पेट में बेचैनी रहने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। समय पर जाँच, उचित इमेजिंग और एंडोस्कोपी की मदद से बीमारी के फैलने से पहले ही उसे पहचाना जा सकता है। इसके अलावा, संतुलित आहार, समय पर निदान, तम्बाकू और मदिरासेवन से परहेज तथा वजन को नियंत्रण में रखने से कैंसर का जोखिम कम हो सकता है।
डॉ. पाखी अग्रवाल, सीनियर कंसल्टैंट, गायने ऑन्कोलॉजी, इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल, दिल्ली ने कहा, ‘‘महिलाएं अपने स्वास्थ्य पर सबसे कम ध्यान देती हैं। कई महिलाएं परिवार और ऑफिस की जिम्मेदारियों के बीच अपने स्वास्थ्य को नजरंदाज करती चली जाती हैं। पीरियड्स के दौरान बहुत ज्यादा खून निकलना, लगातार पेट फूलना, पेल्विक दर्द या मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग कोई सामान्य लक्षण नहीं होते हैं। महिलाओं की नियमित जाँच, सर्वाईकल कैंसर की स्क्रीनिंग और एचपीवी वैक्सीनेशन द्वारा बीमारी को शुरू में ही रोकने में मदद मिलती है। प्रिवेंटिव हैल्थकेयर द्वारा महिलाएं लंबे समय तक खुद को स्वस्थ रख सकती हैं।
डॉ. गौरव त्यागी, सीनियर कंसल्टैंट, न्यूरोसर्जरी, इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल, दिल्ली ने कहा, ‘‘सिर और पीठ में होने वाला दर्द हमेशा मामूली हो, ऐसा जरूरी नहीं। खासकर जब लक्षण लगातार बने रहें, बढ़ते रहें या फिर कमजोरी, सुन्नपन, दौरा या दृष्टि और संतुलन में गड़बड़ी महसूस हो, तो फौरन डॉक्टर से संपर्क करें। न्यूरोलॉजिकल समस्याओं की जाँच तुरंत होनी चाहिए। ऐसे में अगर इलाज में देर होती है, तो बड़ा नुकसान हो सकता है। आज एडवांस्ड इमेजिंग और मिनिमली इन्वेजिव न्यूरोसर्जिकल तकनीकों की मदद से जटिल से जटिल समस्याओं को ज्यादा सटीकता से संभाला जा सकता है। इलाज के बेहतर नतीजों के लिए लक्षणों को तुरंत पहचानना जरूरी है।
डॉ. अंशुल वर्मा, कंसल्टैंट, जीआई एवं एचपीबी सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल, दिल्ली ने कहा, पिछले दशक में कैंसर केयर में बहुत ज्यादा सुधार हुआ है। बेहतर डायग्नोस्टिक्स, प्रेसिजन सर्जरी और मल्टीडिसिप्लिनरी दृष्टिकोण की मदद से कई तरह के गैस्ट्रोइंटेस्टाईनल कैंसर के इलाज में सफलता की दर बढ़ी है। लेकिन मरीजों को बेहतर नतीजे तभी मिलते हैं, जब बीमारी का निदान जल्दी होता है। अगर परिवार में कैंसर, क्रोनिक लिवर डिजीज या लंबे समय तक डाईजेस्टिव गड़बड़ी का इतिहास रहा हो, तो लक्षणों के बढ़ने का इंतजार करने की बजाय नियमित तौर से जाँच कराते रहना चाहिए। जागरुकता और समय पर कार्रवाई नतीजों को बेहतर बनाने के लिए सबसे प्रभावशाली उपाय हैं।
डॉ. हर्षित गर्ग, सीनियर कंसल्टैंट, यूरो-ऑन्कोलॉजी, इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल, दिल्ली ने कहा, ‘‘लोग झिझक के कारण यूरिनरी समस्याओं के बारे में बात नहीं कर पाते हैं, जिससे गंभीर लक्षण भी छिपे रह जाते हैं। मूत्र में खून आना, बार-बार मूत्र लगना, मूत्र करने में दिक्कत या कमर के एक तरफ लगातार दर्द महसूस होना, ये लक्षण महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। ये कोई बढ़ती उम्र के लक्षण नहीं होते हैं। जीवन की बढ़ती प्रत्याशा के साथ प्रोस्टेट, ब्लैडर और किडनी कैंसर के बारे में जागरुक रहना भी बहुत जरूरी हो गया है। समय पर निदान से न केवल इलाज के विकल्प बढ़ जाते हैं, बल्कि जीवन की बेहतर गुणवत्ता भी प्राप्त होती है।
ज्वेलर्स एसोसिएशन, हरिद्वार के प्रतिनिधियों ने इस अभियान की सराहना की और अपने सदस्यों के बीच स्वास्थ्य की जागरुकता बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित की। ‘स्वास्थ्य पर चर्चा’ अभियान से लोगों के बीच जाकर जागरुकता लाने और प्रिवेंटिव हैल्थकेयर को बढ़ावा देने की अपोलो हॉस्पिटल्स की प्रतिबद्धता प्रदर्शित होती है।
इस मौके पर ज्वेलर्स एसोसिएशन उत्तराखंड, स्टेट प्रसिडेंट नीरज गुप्ता, गौरव मासून जनरल सक्रेटरी, अश्वनी गोयल ट्रेजर, हरविंदर सिंह सक्रेटरी, रवि वर्मा वाइस प्रेसिडेंट, विवेक अग्रवाल वाइस प्रेसिडेंट, निपुन मित्तल, मनोज मित्तल और श्रीराम वर्मा आदि मौजूद रहे।

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