लंबित वादों की अब होगी स्मार्ट मॉनिटरिंग, डीएम ने सॉफ्टवेयर सिस्टम विकसित करने के दिए निर्देश
देहरादून। जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने ऋषिपर्णा सभागार, कलेक्ट्रेट में देर शाम मासिक समीक्षा बैठक की। बैठक में राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों, माननीय न्यायालयों से संबंधित प्रकरणों तथा शासन स्तर से संदर्भित मामलों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को सभी वादों का समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण एवं नियमानुसार निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने समस्त उप जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि अपने-अपने न्यायालयों में लंबित वादों की नियमित समीक्षा करते हुए पुराने प्रकरणों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित किया जाए। उन्होंने कहा कि निर्धारित प्रक्रिया एवं समयसीमा के बावजूद किसी भी वाद को बिना ठोस एवं उचित कारण के अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए। लंबित प्रकरणों की नियमित कोर्ट कर प्रभावी पैरवी एवं निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
समीक्षा के दौरान उप जिलाधिकारी एवं तहसीलदार न्यायालयों में धारा 166/167 के अंतर्गत 3 से 5 वर्ष तक पुराने 82 वाद लंबित पाए गए। इस पर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को पुराने वादों के निस्तारण में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लंबे समय से लंबित वादों की नियमित समीक्षा कर उनके निस्तारण के लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाने हुए निस्तारण करें। राजस्व वादों की समीक्षा के दौरान जिले में 15,540 वाद निस्तारण हेतु लंबित पाए गए। जिलाधिकारी ने इस स्थिति पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को निरंतर कोर्ट कर वादों के निस्तारण में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुराने वादों को प्राथमिकता के आधार पर लिया जाए और प्रत्येक न्यायालय में लंबित मामलों की प्रगति की नियमित समीक्षा की जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत निस्तारण योग्य किसी भी प्रकरण को अनावश्यक रूप से लंबित रखने की स्थिति में संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी। धारा 229बी के वादों की समीक्षा के दौरान बताया गया कि 841 वाद निस्तारण हेतु लंबित हैं। जिलाधिकारी ने लंबित वादों का विभागवार एवं न्यायालयवार परीक्षण करते हुए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने पुराने प्रकरणों को चिह्नित कर प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा। धारा 176 के वादों की समीक्षा में बताया गया कि अगस्त माह में 13 वादों का निस्तारण किया गया है, जबकि अभी 1,157 वाद निस्तारण हेतु लंबित हैं। इनमें 3 से 5 वर्ष पुराने 179 वाद भी शामिल हैं। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पुराने लंबित वादों के निस्तारण के लिए विशेष प्रयास किए जाएं तथा अगली मासिक समीक्षा बैठक में अद्यतन विवरण के साथ उपस्थित हों।
जिलाधिकारी ने निर्विवाद विरासतन वादों के भी युद्धस्तर पर निस्तारण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन प्रकरणों में किसी प्रकार का विवाद नहीं है, ऐसे मामलों को अनावश्यक रूप से लंबित रखने का कोई औचित्य नहीं है। संबंधित अधिकारी ऐसे मामलों का त्वरित परीक्षण करते हुए नियमानुसार निस्तारण सुनिश्चित करें, ताकि आमजन को राजस्व न्यायालयों से संबंधित मामलों में अनावश्यक रूप से कार्यालयों एवं न्यायालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
जिलाधिकारी ने माननीय न्यायालयों में लंबित तथा संबंधित विभागों द्वारा अनुपालन किए जाने वाले मामलों की कम्प्लायंस की अद्यतन स्थिति तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि न्यायालयों के आदेशों के अनुपालन की स्थिति की नियमित निगरानी की जाए तथा संबंधित विभागों से समयबद्ध अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए। इसी प्रकार मा0 मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव एवं सचिव स्तर से संदर्भित मामलों में की गई कार्रवाई एवं कम्प्लायंस की अद्यतन स्थिति भी व्यवस्थित रूप से दर्ज करने के निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि लंबित वादों एवं उनके अनुपालन की स्थिति के लिए सॉफ्टवेयर आधारित स्मार्ट मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया जाए। इस व्यवस्था में प्रत्येक प्रकरण की वर्तमान स्थिति, लंबित रहने का कारण, संबंधित अधिकारी तथा निस्तारण की निर्धारित समयसीमा जैसी जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हो। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था को एक ऑर्गनाइज्ड एवं मैनेजमेंट सिस्टम के रूप में स्मार्ट प्रारूप में विकसित किया जाए, ताकि लंबित वादों की नियमित मॉनिटरिंग, समयबद्ध निस्तारण तथा अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। जिलाधिकारी ने कहा कि न्यायालयों में लंबित प्रकरणों का निस्तारण जितना आवश्यक है, उतना ही महत्वपूर्ण उनकी प्रभावी मॉनिटरिंग व्यवस्था विकसित करना भी है। सॉफ्टवेयर आधारित व्यवस्था के माध्यम से प्रत्येक प्रकरण की वास्तविक स्थिति की जानकारी तत्काल प्राप्त हो सकेगी तथा लंबित रहने के कारणों की पहचान करते हुए समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी।
बैठक में अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व के.के. मिश्रा, अपर जिलाधिकारी प्रशासन स्मृता परमार, संयुक्त मजिस्ट्रेट राहुल आनंद, नगर मजिस्ट्रेट राकेश तिवारी, उप जिलाधिकारी रविन्द्र ज्वांठा, उप जिलाधिकारी सदर अपूर्वा सिंह, उप जिलाधिकारी डोईवाला अपर्णा ढौंडियाल, उप जिलाधिकारी ऋषिकेश कुमकुम जोशी, संयुक्त निदेशक विधि गिरीश चन्द्र पंचौली, जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) गुरू प्रसाद रतूड़ी सहित संबंधित पटल के पटल सहायक उपस्थित रहे।

