अब नहीं बर्बाद होगा करोड़ों लीटर पानी, हरियाली और खेतों को मिलेगा जीवनदान

कारगी रोड एसटीपी का ट्रीटेड जल होगा उपयोगी
पेड़ों, खेतों और फायर ब्रिगेड के काम आएगा ट्रीटेड जल

देहरादून: कारगी रोड स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से रोजाना फिल्टर होकर निकलने वाला करीब तीन करोड़ लीटर पानी अब बेकार बहकर बिंदाल नदी में नहीं जाएगा। जल संस्थान ने इस ट्रीटेड पानी के सुनियोजित उपयोग की व्यापक योजना तैयार की है, जिसके तहत एसटीपी परिसर में बड़ा स्टोरेज टैंक बनाया जाएगा और वहां जमा साफ पानी का उपयोग शहर की हरियाली, खेतों की सिंचाई और फायर ब्रिगेड की जरूरतों के लिए किया जाएगा।
अब तक एसटीपी से निकलने वाला ट्रीटेड पानी सीधे नदी में डिस्चार्ज कर दिया जाता था, जबकि दूसरी ओर शहर में पेड़-पौधों की सिंचाई के लिए अलग से टैंकरों के जरिए पानी खर्च किया जाता रहा है। नई योजना लागू होने पर इस विसंगति को दूर करते हुए एक ही पानी का बहुउद्देश्यीय उपयोग संभव हो सकेगा।

यह है योजना
योजना के अनुसार एसटीपी में वाटर टैंक बनाया जाएगा। जिसमें ट्रीटेड पानी स्टोर किया जाएगा, जहां से पाइपलाइन के माध्यम से आईएसबीटी से रिस्पना पुल तक सड़क किनारे और डिवाइडर में लगे पेड़-पौधों की सिंचाई की जाएगी। इसके लिए बीच-बीच में ऑटोमेटिक फव्वारे (स्प्रिंकलर) लगाए जाएंगे, जबकि पेड़ों की जड़ों तक अलग लाइन बिछाई जाएगी ताकि पानी सीधे पौधों तक पहुंचे और बर्बादी न हो।

किसानों को राहत
इसी ट्रीटेड पानी को पाइपलाइन से बॉम्बे बाग नहर से भी जोड़ा जाएगा। नहर कनेक्शन होने पर पथरी बाग, विद्या विहार, देहरा खास, राजराजेश्वरी कॉलोनी और पटेल नगर के आसपास के खेतों को अतिरिक्त सिंचाई जल मिल सकेगा। गर्मियों में जब पानी की किल्लत बढ़ती है, तब यह व्यवस्था किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है और कृषि उत्पादकता बढ़ने की उम्मीद भी जताई जा रही है।

आपात स्थिति के लिए बनेगा फिलिंग पंप
योजना में शहरी आपदा प्रबंधन को भी ध्यान में रखा गया है। आईएसबीटी से रिस्पना मार्ग पर चयनित स्थानों पर वाटर फिलिंग पंप बनाए जाएंगे, जहां एसटीपी से आने वाले साफ पानी से फायर ब्रिगेड के वाहन आपात स्थिति में तुरंत पानी भर सकेंगे। इससे आग लगने की घटनाओं में प्रतिक्रिया समय घटेगा और फायर सेफ्टी व्यवस्था मजबूत होगी।

क्या कहते है विशेषज्ञ
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ट्रीटेड पानी की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप बनाए रखी गई और पाइपलाइन व स्प्रिंकलर सिस्टम का नियमित रखरखाव हुआ, तो यह परियोजना देहरादून में जल प्रबंधन का प्रभावी मॉडल बन सकती है। हालांकि इसके लिए निरंतर मॉनिटरिंग, लीकेज नियंत्रण और किसानों व संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय बेहद जरूरी होगा।
तेजी से फैलते देहरादून शहर में पानी की बढ़ती मांग, घटते भूजल स्तर और हरियाली पर बढ़ते दबाव के बीच ट्रीटेड वॉटर का पुन: उपयोग एक अहम कदम माना जा रहा है। योजना जमीन पर उतरने के बाद रोजाना बर्बाद हो रहे करोड़ों लीटर पानी को उपयोगी संसाधन में बदला जा सकेगा। अब सबकी नजर इसके क्रियान्वयन की गति और गुणवत्ता पर टिकी है।

पहले चरण में टैंक और मुख्य पाइपलाइन बनाई जाएगी। दूसरे चरण में स्प्रिंकलर नेटवर्क। तीसरे चरण में नहर कनेक्शन और फायर फिलिंग प्वाइंट। यदि काम समय पर पूरा हुआ तो आने वाले समय में देहरादून में पानी प्रबंधन का यह मॉडल मिसाल बन सकता है  – परमेंद्र, अधिशासी अभियंता जलसंथान

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