देहरादून। सरकारी संगठन रूरल लिटिगेशन एंड एंटाइटलमेंट केंद्र (RLEK), जो महिलाओं, बच्चों तथा अन्य वंचित समुदायों और जनजातियों के कानूनी अधिकारों के लिए कार्य करने के लिए जाना जाता है, ने महिला घरेलू कामगारों के लिए कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम (POSH Act 2013) विषय पर प्रशिक्षण आयोजित किया। 20 मई 2026 को RLEK द्वारा एक संवादात्मक सत्र का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य घरेलू सहायिकाओं को पॉश अधिनियम के दायरे और महत्व के बारे में जागरूक करना था। अधिवक्ता मधु कुकसाल इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की मुख्य अतिथि रहीं और अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।

कार्यक्रम की शुरुआत RLEK की अध्यक्षा प्रतिमा मेनन के स्वागत भाषण से हुई, जिसमें उन्होंने प्रतिभागियों को कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न संबंधी कानूनी जागरूकता के महत्व के बारे में संबोधित किया। इस संवेदनशील विषय पर प्रतिभागियों को सहज महसूस कराने के लिए कुछ मनोरंजक गतिविधियाँ और आइस-ब्रेकिंग गेम्स आयोजित किए गए, जिससे एक मैत्रीपूर्ण वातावरण बना और महिलाओं को खुलकर अपनी बात रखने का अवसर मिला।
इसके बाद एक वीडियो और प्रस्तुति के माध्यम से प्रतिभागियों को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम तथा पॉश कानून के प्रावधानों की जानकारी दी गई। पॉश कानून के दायरे और उसकी व्यापक व्याख्या को समझाने के लिए विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए RLEK के इंटर्न्स ने कई रोल प्ले प्रस्तुत किए। प्रतिभागियों ने इन प्रस्तुतियों को उत्साहपूर्वक सराहा और इससे उन्हें यह समझने में मदद मिली कि पॉश कानून केवल शारीरिक छेड़छाड़ तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मौखिक और ऑनलाइन उत्पीड़न भी शामिल है। पूरे सत्र के दौरान RLEK ने यह सुनिश्चित किया कि प्रतिभागियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही न दी जाए, बल्कि उन्हें तकनीक के माध्यम से शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया भी सिखाई जाए। इसके तहत महिलाओं को SHe-Box पोर्टल के उपयोग की जानकारी दी गई, ताकि वे उत्पीड़न की स्थिति में उचित कार्रवाई कर सकें। इस प्रकार RLEK ने एक बार फिर वंचित समुदायों और जनजातियों के हित में अपने निरंतर समर्पण को प्रदर्शित किया। इसके पश्चात मुख्य अतिथि अधिवक्ता मधु कुकसाल ने भावपूर्ण संबोधन दिया। उन्होंने RLEK के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यौन उत्पीड़न संबंधी कानूनी जानकारी को वंचित समुदायों तक पहुँचाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने महिलाओं के कार्यस्थल पर सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी विशेष बल दिया।
