चमोली ( प्रदीप लखेड़ा ) : शुक्रवार को श्री नंदादेवी बड़ीजात यात्रा अपने 15 वें पड़ाव पातर नचौणिया व बगवाबासा पहुंचेगी। जबकि बधाण की श्री नंदादेवी राजराजेश्वरी की लोकजात यात्रा शुक्रवार को वेदनी में पूजा-अर्चना(नंदा सप्तमी की जात) के बाद नंदा सिद्धपीठ देवराड़ा थराली के लिए वापस लौट पड़ी हैं।
श्री नंदादेवी बड़ीजात यात्रा के तहत दशोली, बण्ड, ज्वाल्पा देवी की डोलियां,छतोलियां एवं चौसिंगा खाडूओं के साथ देवी भक्तों ने वेदनी कुंड में स्नान करने के साथ ही यहां स्थापित नंदादेवी मंदिर में पूजा-अर्चना की और उसके बाद 14 वें पड़ाव वेदनी से विदा होकर 15 वें व दूसरे निर्जन पड़ाव पातर नचौणिया व बगवाबासा पहुंचेगी।
बड़ीजात यात्रा में चल रहे श्रद्धालुओं के हौंसले काफी अधिक बुलंद हैं। शनिवार को बड़ीजात यात्रा रहस्यमई रूपकुंड यात्रा मार्ग से सर्वाधिक कठिन रास्तों में शुमार ज्यूरागली होते हुए 16 वें व तीसरे निर्जन पड़ाव शीला समुद्र पहुंचेगी। जबकि श्री नंदादेवी राजराजेश्वरी बधाण की डोली 13 वें पड़ाव गैरोलीपातल से शुक्रवार को प्रातः यात्रा कर वेदनी बुग्याल पहुंची, यहां पर श्रद्धालुओं ने वेदनी कुंड की परिक्रमा कर एवं पितरों को तर्पण देते हुए उनके तारण की प्रार्थना की। इसके बाद दोपहर बाद वापसी के तहत यात्रा वेदनी बुग्याल से आली बुग्याल,दीदना होते हुए रात्रि प्रवास के लिए देवाल ब्लाक के बांक गांव पहुंचेगी, शनिवार को यात्रा लोहाजंग,बगड़ीगाड़ होते हुए रात्रि प्रवास पर ल्वाणी गांव पहुंचेगी।

