चमोली ( प्रदीप लखेड़ा )
निजमुला घाटी के पगना-पाणा-ईरानी मोटर मार्ग पर निर्माणाधीन झिंजी पुल पिछले आठ वर्षों से अधूरा पड़ा है। पुल निर्माण में हो रही देरी से ग्रामीणों में भारी रोष है। लोगों का कहना है कि सरकार डिजिटल इंडिया के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। ग्रामीणों ने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों पर भी अनदेखी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि चुनाव के समय और प्रवास के दौरान नेता गांव में पहुंचते हैं, जनसभाएं करते हैं, लेकिन झिंजी पुल के मुद्दे पर चुप्पी साध लेते हैं। ग्राम प्रधान ईरानी दीपा देवी ने कहा कि पुल निर्माण उनके लिए अस्तित्व का सवाल बन चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के अधिकारियों पर भी लापरवाही के आरोप लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत करने पर अधिकारी फोन तक नहीं उठाते, जिससे लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। पुल न होने से क्षेत्रवासियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बीमारों और गर्भवती महिलाओं को डंडी-कांडी के सहारे उफनते गदेरों से पार कर अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। वहीं राशन और जरूरी सामान ढोने में भी लोगों को अधिक खर्च उठाना पड़ रहा है।
क्षेत्र पंचायत सदस्य सीमा नेगी ने चेतावनी दी कि यदि जल्द निर्माण कार्य में तेजी नहीं लाई गई तो ग्रामीण आंदोलन तेज करेंगे। उन्होंने कहा कि राजनीतिक कार्यक्रमों का बहिष्कार किया जाएगा और जरूरत पड़ी तो जिला मुख्यालय में तालाबंदी भी की जाएगी। ग्रामीणों ने साफ किया है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर काम चाहिए, अन्यथा आंदोलन उग्र रूप ले सकता है।

